परिषद की अधिकारिता-

(1) परिषद निम्नलिखित मामलों में मुख्य नियंत्रण प्राधिकारी होगा :-


(क) वादों, अपीलों या पुनरीक्षणों के निस्तारण से सम्बन्धित सभी मामलों में; और


(ख) राज्य सरकार के अधीक्षण, निदेश और नियन्त्रण के अधीन रहते हुए, इस संहिता में दिये गये सभी अन्य मामलों में।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, परिषद इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि
द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग, कृत्यों का निष्पादन और कर्तव्यों का निर्वहन करेगी।


(3)  राज्य  सरकार  परिषद  के  किसी  सदस्य  को  या  तो  सामान्यतया  या  किसी  विशिष्ट  क्षेत्र  या  विषय  के
सम्बन्ध में परिषद को प्रदत्त या उस पर अधिरोपित सभी या किसी शक्ति का प्रयोग, कृत्य का निर्वहन और कर्तव्य का पालन करने के लिए प्राधिकृत कर सकती है।