समस्त भूमि आदि में राज्य का हक-
समस्त सार्वजनिक मार्गों, गलियों, पथों, सेतुओं, खाइयों, उन पर
या उनके बगल में तटबन्धों और बाड़ों, नदीतल, झरनों, नालों, झीलों, तालाबों, और पोखरां और समस्त नहरों और जल मार्गों और समस्त स्थिर और प्रवाहमान जल और समस्त भूमि जहाँ कहीं स्थित हो, जो किसी व्यक्ति के स्वामित्व में न हो, को, और जहाँ तक किन्हीं व्यक्तियों के किन्हीं अधिकारों को उनके अन्तर्गत या उन पर स्थापित किये जाने का संबंध हो, उसके सिवाय और तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में यथाशक्य उपबन्ध किये जाने के सिवाय, एतद्द्वारा उनमें या उन पर या उनसे सम्बन्धित समस्त अधिकारों सहित राज्य सरकार की सम्पत्ति घोषित की जाती है :
परन्तु इस धारा में अन्तर्विष्ट किसी बात से, किसी ऐसी सम्पत्ति पर इस संहिता के प्रारम्भ होने के दिनांक से ठीक पहले, विद्यमान किसी व्यक्ति के अधिकार, प्रभावित नहीं समझे जायेंगे।