वृक्षों पर अधिकार-
(1) किसी जोत या बाग में विद्यमान समस्त वृक्षों को इस संहिता के उपबंधों या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसे व्यक्ति का समझा जाएगा जो ऐसा जोत या बाग धारण करता हो।
(2) किन्हीं जोतों की सीमा पर विद्यमान समस्त वृक्षों को ऐसे व्यक्तियों का संयुक्त रूप से समझा जाएगा जो
ऐसी सीमा के किसी ओर जोतों को धारण करते हों।
(3) किसी व्यक्ति से सम्बन्धित या उसके द्वारा धारित आबादी में या किसी दखल न की हुई भूमि में स्थित समस्त वृक्ष इस संहिता के प्रारम्भ होने के तत्काल पूर्व ऐसे व्यक्ति से निरन्तर सम्बन्धित रहेंगे या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि और इस संहिता के अधीन बनायी गयी किसी नियमावली के अध्यधीन धृत रहेंगे।
(4) धारा 57 के उपबन्धों के अध्यधीन उपधारा (1) से (3) में निर्दिष्ट वृक्षों से भिन्न समस्त वृक्षों, झाड़, जंगल, या अन्य प्राकृतिक उत्पाद, जहाँ कहीं उगे हों या रोपित हों, को इस संहिता के प्रारम्भ होने के दिनांक से राज्य सरकार की सम्पत्ति समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण- इस धारा और धारा 59 के प्रयोजनों के लिए पद दखल न की हुई भूमि का तात्पर्य भू-धारकों द्वारा धारित भूमि से भिन्न ग्राम में स्थित भूमि से है।