ग्राम पंचायतों और अन्य स्थानीय  प्राधिकरणों को भूमि आदि का सौंपा जाना- 

(1) राज्य सरकार विहित रीति से प्रकाशित किये जाने वाले साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस संहिता के उपबन्धों के अनुसार अधीक्षण, संरक्षण, प्रबन्धन और नियंत्रण के प्रयोजनों के लिए ग्राम पंचायत या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण को उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट ऐसी समस्त या कोई चीजें सौंप सकती है जो राज्य सरकार में निहित हों।
(2) निम्नलिखित चीजें उपधारा (1) के अधीन किसी ग्राम पंचायत  या अन्य स्थानीय प्राधिकरण को सौंपी जा सकती हैं, अर्थात् :-
(एक) किसी जोत या बाग में तत्समय समाविष्ट भूमि के सिवाय भूमि, जो खेती योग्य हां या अन्यथा हों;
(दो) ग्राम पंचायत की भूमि पर लगा बाग, चरागाह, कब्रिस्तान, श्मशान घाट, उर्वरक गर्ते, खलिहान, चकरोड, सम्पर्क मार्ग, सेक्टर मार्ग, नदी तल भूमि, सड़क, सड़क की खन्ती, मलिन जल क्षेत्र;
(तीन) वन एवं मत्स्य क्षेत्र;
(चार)  किसी  जोत  में या  किसी  जोत  की  सीमा पर  या  किसी  बाग या  आबादी  में स्थित  वृक्षों  से भिन्न वृक्ष या दखल न की हुई भूमि पर स्थित कोई वृक्ष;
(पांच) हाट, बाजार, मेला, तालाब, सरोवर, जल मार्ग, निजी नौघाट, पगडन्डी और आबादी स्थल;
(छः)  निखात  निधि  अधिनियम,  1878  के  उपबन्धों  के  अध्यधीन  धारा  55  में  विनिर्दिष्ट  और  राज्य सरकार से सम्बन्धित कोई सम्पत्ति।
(3) ऐसी प्रत्येक भूमि या अन्य चीज, जो-
(क) उत्तर प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 या उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 के उपबन्धों के अधीन किसी ग्राम  पंचायत  या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण में निहित हो ;
(ख)  इस  संहिता  द्वारा  निरसित  किसी  अधिनियम  के  अधीन  किसी  ग्राम  पंचायत  या  किसी  अन्य स्थानीय प्राधिकरण के प्रभार के अधीन रखी गयी हो ;
(ग)  इस  संहिता  के  प्रारम्भ  होने के  पूर्व  या  उसके  पश्चात्  किसी  ग्राम  पंचायत  या  अन्य  स्थानीय प्राधिकरण के कब्जे में अन्यथा, आयी हो ;
उसे इस संहिता के उपबन्धों के अनुसार अधीक्षण, संरक्षण, प्रबन्धन और नियंत्रण के प्रयोजनार्थ इस संहिता के प्रारम्भ होने के दिनांक से या उसके इस प्रकार कब्जे में आने के दिनांक से, यथास्थिति ऐसी ग्राम पंचायत या अन्य स्थानीय प्राधिकरण को सौंपा हुआ समझा जायेगा।
(4) राज्य सरकार विहित रीति से प्रकाशित किए जाने वाले अनुवर्ती आदेश द्वारा, -
(क)  उपधारा  (1)  के  अधीन  जारी  किए  गए  किसी  पूर्ववर्ती  आदेश  में  परिवर्द्धन  कर  सकती  है, संशोधन कर सकती है, परिवर्तन कर सकती है या उसे निरस्त कर  सकती है;
(ख) अधीक्षण, संरक्षण, प्रबन्धन और नियंत्रण के लिये उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन सौंपी गयी या सौंपी हुई समझी गयी किसी भूमि या  अन्य  चीज  को  किसी  अन्य  ग्राम  पंचायत  या  अन्य स्थानीय प्राधिकरण को अन्तरित कर सकती है;
(ग) किसी ग्राम पंचायत  या स्थानीय प्राधिकरण को सौंपी गई या सौंपी हुई समझी गई या अन्तरित की गई किसी भूमि या अन्य चीज को ऐसी निबन्धन एवं शर्तों पर जैसी कि विहित की जाएं वापस ले सकती है;
(घ)  ऐसी  शर्तें  और  निबन्धन  अधिरोपित  कर  सकती  है,  जिनके  अध्यधीन  इस  धारा  के  अधीन अधीक्षण, संरक्षण, प्रबन्धन और नियंत्रण की शक्तियों का प्रयोग किया जाएगा।
(5) जहां उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोई चीज किसी ग्राम पंचायत  को सौंपी गई हो या सौंपी हुई समझी गयी हो और ग्राम या उसका ऐसा कोई भाग जिसमें ऐसी चीजें स्थित हों, ग्राम पंचायत  के क्षेत्र के बाहर हो वहां
ऐसी ग्राम  पंचायत  या उसकी भूमि प्रबन्धक समिति इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा जारी किये गये किसी साधारण या विशेष आदेश के अध्यधीन इस संहिता या उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 द्वारा या उसके  अधीन  ग्राम  पंचायत  या  किसी  भूमि  प्रबन्धक  समिति  पर  समनुदेशित,  अधिरोपित  या  प्रदत्त  कृत्यों, कर्तव्यों और शक्तियों का निष्पादन, निर्वहन और प्रयोग करेगी मानों वह ग्राम या उसका भाग भी उसके क्षेत्र में आता हो।
(6) जहां उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट कोई चीज, ग्राम  पंचायत  से भिन्न किसी स्थानीय प्राधिकरण को
सौंपी गयी हो या सौंपी हुई  समझी गयी हो वहां इस अध्याय के उपबन्ध यथावश्यक परिवर्तन सहित ऐसे स्थानीय प्राधिकरण पर लागू होंगे।