आबादी स्थलों का आवंटन-
(1) धारा 63 में निर्दिष्ट भूमि का आवंटन करने में निम्नलिखित वरीयता क्रम का अनुपालन किया जायेगा :-
(क) ग्राम सभा में रहने वाले और अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछडे़ वर्गों या राज्य सरकार द्वारा यथा अवधारित गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले सामान्य वर्ग के व्यक्तियों से संबंधित कोई कृषि श्रमिक या कोई ग्रामीण कारीगर ;
(ख) ग्राम सभा में रहने वाला कोई अन्य कृषि श्रमिक या कोई ग्रामीण कारीगर ;
(ग) ग्राम सभा में रहने वाले और अनूसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछडे़ वर्गों या राज्य सरकार द्वारा यथा निर्धारित गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले सामान्य श्रेणी से सम्बन्धित कोई व्यक्ति :
परन्तु उसी श्रेणी के अन्तर्गत विधवा और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को अधिमान दिया
जायेगा।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिये-
(एक) ‘‘अन्य पिछड़ा वर्ग’’ का तात्पर्य उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनूसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछडे़ वर्गों के लिये आरक्षण) अधिनियम 1994 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 4 सन् 1994) की अनुसूची एक में विनिर्दिष्ट नागरिकों के अन्य पिछडे़ वर्गों से है ;
(दो) गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले ‘सामान्य श्रेणी के व्यक्ति’ का तात्पर्य ऐसे व्यक्तियों से है जैसा कि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अवधारित किया जाय।
(2) इस धारा के अधीन आवंटन करने में ऐसे व्यक्ति को अधिमान दिया जायेगा जिसके पास उसके परिवार की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए या तो कोई भवन न हो या आवास अपर्याप्त हो।
(3) इस धारा के अधीन आवंटित प्रत्येक भूमि को आवंटी द्वारा ऐसे निबन्धन और शर्तों पर धारित किया जाएगा जो कि विहित की जायेंः
परन्तु यह कि यदि आवंटी विवाहित व्यक्ति है और उसकी पत्नी जीवित है, तो वह इस प्रकार
आवंटित भूमि में बराबर हिस्से की सह-आवंटी होगी।