स्थायी  अधिवक्ता  और  अन्य  अधिवक्ता-

(1) राज्य सरकार ऐसी निबन्धन  और शर्तों पर और ऐसी रीति से, जैसी विहित की जाए, निम्नलिखित की नियुक्ति कर सकती हैः-
(क)  इलाहाबाद  उǔच न्यायालय और  उसके  लखनऊ  खण्डपीठ प्रत्येक  में  एक  या  एक  से  अधिक
स्थायी अधिवक्ता (राजस्व);
(ख)  इलाहाबाद  और  लखनऊ  प्रत्येक  राजस्व  परिषद्  के  लिए  एक  या  एक  से  अधिक  स्थायी अधिवक्ता (राजस्व);
(ग)  मण्डलीय  मुख्यालय  के  लिए  एक  या  एक  से  अधिक  मण्डलीय  शासकीय  अधिवक्ता  (राजस्व) और;
(घ) ज़िला मुख्यालय के लिये एक ज़िला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) और एक या एक से अधिक अपर ज़िला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) ।
(2) कलेक्टर ऐसी निबन्धन और शर्तों पर और ऐसी रीति से जैसी विहित की जाए, प्रत्येक तहसील के लिए दो से अनधिक पैनल अधिवक्ताओं (राजस्व) की नियुक्ति कर सकता है।
(3) धारा 62 की उपधारा (2) के उपबन्धों के अध्यधीन उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन नियुक्त विधि व्यवसायी किसी लिखित प्राधिकार के बिना किसी ग्राम सभा, ग्राम पंचायत या भूमि प्रबन्धक समिति की ओर से  किसी  न्यायालय  या  प्राधिकरण,  जिसके  लिए  वह  इस  प्रकार  नियुक्त  किया  गया  हो,  में  अभिवचन  या कार्यवाही कर सकते हैं।
(4) कोई ग्रामसभा, ग्राम पंचायत या भूमि प्रबन्धक समिति  इस धारा के अधीन नियुक्त किसी व्यक्ति से भिन्न किसी विधि व्यवसायी को कलेक्टर की पूर्व अनुज्ञा के बिना नहीं रखेगी।
(5) न्यायालय फीस अधिनियम, 1870 (अधिनियम संख्या 7 सन् 1870) में अनर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी इस धारा के अधीन नियुक्त किसी विधि व्यवसायी द्वारा दाखिल किसी वकालतनामा या हाजिरी के ज्ञापन पर कोई न्यायालय फीस संदेय नहीं होगी।
(6) इस धारा के अधीन नियुक्त विधि व्यवसायी किसी ग्राम सभा, ग्राम पंचायत या भूमि प्रबन्धक समिति के विरूद्ध ऐसे किसी न्यायालय, जिसमें वह नियुक्त किया गया हो, के समक्ष अभिवचन या कार्यवाही करने के लिए सक्षम नहीं होंगे।
(7) राज्य सरकार, गजट में अधिसूचना द्वारा, इस संहिता या इसके द्वारा निरसित अधिनियमों के अधीन ग्राम पंचायत,  ग्राम  सभा  या  भूमि  प्रबन्धक  समिति  द्वारा  या  उनके  विरूद्ध  दाखिल  प्रकरणों  की  निगरानी  और नियुक्त  नामिका  अधिवक्ताओं  के  निष्पादन  आधारित  वार्षिक  मूल्यांकन  तथा  उपर्युक्त  प्रयोजन  के  लिए  किसी विधि अधिकारी की नियुक्ति के लिए भी, निदेश जारी कर सकती है।