घोषणा का रद्द किया जाना-
(1) जब कभी किसी ऐसी जोत या उसके भाग, जिसके सम्बन्ध में धारा 80 के अधीन घोषणा की गयी है, कृषि से सम्बन्धित किसी प्रयोजन के लिये उपयोग किया जाता है तब उप ज़िलाधिकारी स्व-प्रेरणा से या इस निमित्त आवेदन दिए जाने पर ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी विहित की जाए, ऐसी घोषणा को रद्द कर सकता है।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन कोई घोषणा रद्द की जाए वहां जोत या उससे सम्बन्धित भाग के सम्बन्ध में निम्नलिखित परिणाम सुनिश्चित किए जायेंगे, अर्थात्ः-
(क) जोत या उसका भाग अन्तरण और न्यागमन के विषय में इस अध्याय के द्वारा या अधीन आरोपित सभी निबन्धनों के अधीन हो जाएगा;
(ख) जोत या उसके भाग का उस कृषि वर्ष के जिसमें घोषणा को रद्द करने का आदेश दिया जाए, प्रारम्भ के दिनांक से भू-राजस्व का भुगतान किया जाएगाः
परन्तु जब तक इस संहिता के उपबन्धों के अनुसार ऐसी जोत या भाग का कोई भू-राजस्व पुनर्निर्धारित न किया जाए तब तक धारा 80 के अधीन घोषणा किए जाने के पूर्व ऐसी जोत या उसके भाग के सम्बन्ध में देय या देय समझे गए भू-राजस्व को ऐसी जोत या भाग के सम्बन्ध में देय भू-राजस्व समझा जाएगा;
(ग) जहां भूमि किसी संविदा या पट्टा के आधार पर उसके भूमिधर से भिन्न किसी व्यक्ति के कब्जे में हो और ऐसी संविदा या पट्टा के निबन्धन इस संहिता के उपबन्धों से असंगत हो, वहां ऐसी संविदा या पट्टा, ऐसी असंगति की सीमा तक शून्य हो जाएगा और कब्जाधारी व्यक्ति को भूमिधर के वाद पर बेदखल किया जा सकेगाः
परन्तु घोषणा के रद्द किए जाने के दिनांक को विद्यमान भूमि-बन्धक को ऐसी भूमि पर देय एवं प्रतिभूत धनराशि के लिये दृष्टि बन्धक द्वारा प्रतिस्थापित समझा जाएगा जिसकी ब्याज की दर ऐसी
होगी जैसी विहित की जाए।