सुधार जिसे न हटाया जाय-
(1)भूमिधर के लिए उस भूमि पर जिसका वह भूमिधर है ऐसी भूमि पर खेती के लिए या उसका अधिक सुगम उपयोग करने के लिए उस भूमि पर कोई सुधार करना विधिपूर्ण होगा।
(2) जहां किसी खातेदार का किसी जोत या उसके भाग में अधिकार, हक या हित इस संहिता के उपबन्धों
के अधीन या अनुसार समाप्त हो जाय, वहां वह उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा किये गये किसी सुधार कार्य को हटाने या प्रयोग में लाने का हकदार न होगा।