विनिमय-

(1)  संहिता  की  धारा  77  में  किसी  बात  के  होते  हुये  भी,  कोई  भूमिधर  उप  ज़िलाधिकारी  की लिखित पूर्वानुमति से अपनी भूमि का विनिमय :-
(क) अन्य भूमिधर द्वारा धारित भूमि से, या
(ख) धारा 59 के अधीन किसी ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरण को सौंपी गयी या न्यस्त समझी गयी भूमि से कर सकता है।
(2) उप ज़िलाधिकारी उपधारा (1) के अधीन निम्नलिखित मामलों में अनुज्ञा से इन्कार कर देगा, अर्थात् :-
(क)  यदि  ऐसा  विनिमय  जोतों  की  चकबन्दी  या  कृषि  कार्य  में  सुविधा  सुनिश्चित  करने  के  लिए आवश्यक नहीं है; या
(ख)  यदि विनिमय  में  दी गयी  और  प्राप्त भूमि का विहित  रीति  से अवधारित मूल्यांकनों के मध्य का अन्तर निम्नतर मूल्यांकन के दस प्रतिशत से अधिक हो जाता है; या
(ग)  यदि  विनिमय  में  दी  गयी  और  प्राप्त  भूमि  के  क्षेत्रफलों  के  मध्य  का  अन्तर  निम्नतर  क्षेत्रफल  के पǔचीस प्रतिशत से अधिक हो जाता है; या
(घ)  उपधारा  (1)  के  खण्ड  (ख)  में  निर्दिष्ट  भूमि  के  मामले  में  यदि  वह  नियोजित  उपयोग  के  लिए आरक्षित है या ऐसी भूमि है जिसमें भूमिधरी अधिकार प्रोद्भूत नहीं होते हैं; या
(ङ) यदि भूमि एक ही तहसील के एक ही गांव या उससे लगे हुए गांव में स्थित न होः
परन्तु  यह  कि  राज्य  सरकार,  इस  धारा  की  उपधारा  (2)  के  खण्ड  (घ)  में  उल्लिखित  भूमि  से विनिमय की अनुज्ञा विहित शर्तों पर और विहित रीति से, दे सकती है।
(3)  इस  धारा  में  दी  गयी  कोई  बात  किसी  व्यक्ति  को  किसी  जोत  में  उसके  अविभाजित  हित  को  विनिमय करने  हेतु  सशक्त  करती  हुयी  नहीं  समझी  जाएगी  सिवाय  वहां  जहां  ऐसा  विनिमय  दो  या  अधिक  सह हिस्सेदारों के बीच हो।
(4)  रजिस्ट्रीकरण  अधिनियम,  1908  (अधिनियम  संख्या  16,  सन्  1908)  में  दी  गयी  कोई  बात  इस  धारा  के अनुसरण में किसी विनिमय पर लागू नहीं होगी।