संहिता के उल्लंघन में भूमिधर द्वारा अंतरण का परिणाम-
(1) जहां किसी भूमिधर द्वारा किसी जोत
या उसके भाग में हित का अंतरण धारा 104 के अधीन शून्य हो जाय वहां ऐसे अन्तरण के दिनांक से निम्नलिखित परिणाम होंगे अर्थात्ः-
(क) ऐसे अंतरण की विषय-वस्तु सभी भारों से मुक्त होकर राज्य सरकार में निहित हो जायेगी;
(ख) उस जोत या उसके भाग में विद्यमान वृक्ष, फसल, कुंएं और अन्य सुधार सभी भारों से मुक्त होकर, राज्य सरकार में निहित हो जायेंगे;
(ग) खण्ड (क) और खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट सम्पत्तियों में अंतरक और अंतरिती का हित समाप्त हो जायेगा;
(घ) खण्ड (ग) के अधीन अंतरक के हित की समाप्ति से किसी असामी का उसके अधीन धारण करने वाला हित समाप्त हो जायेगा।
(2) जहां कोई भूमि या अन्य सम्पत्ति उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार में निहित हो गयी है कलेक्टर के लिये ऐसी भूमि और अन्य सम्पत्ति का कब्जा लेना और ऐसे व्यक्ति को जिसका ऐसी भूमि या सम्पत्ति पर अध्यासन हो, को उससे बेदखल करने का निदेश देना विधिसम्मत होगा और इस प्रयोजन के लिए कलेक्टर ऐसे बल का प्रयोग कर सकता है या करा सकता है जो आवश्यक हो और धारा 59 के उपबन्ध आवश्यक परिवर्तन सहित ऐसी सम्पत्ति पर लागू होंगे।