भूमिधर या असामी द्वारा वसीयत-

(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर किसी जोत में अपने हित का इǔछा-पत्र द्वारा वसीयत कर सकता है।
(2)  अनुसूचित  जाति  या  अनुसूचित  जनजाति  से  सम्बन्धित  संक्रमणीय  अधिकारों  वाले  किसी  भूमिधर  के सम्बन्ध में धारा 98 और 99 के उपबंध वसीयत किए जाने के निमित्त उसी प्रकार लागू होंगे  जैसा कि वे जीवनकाल में अन्तरण के लिए लागू होते हैं।
(3) इस धारा के अधीन प्रत्येक इǔछा-पत्र किसी विधि, रूढ़ि या प्रथा में किसी बात के होते हुए भी लिखित
रूप में और दो साक्षियों द्वारा अनुप्रमाणित होगा और रजिस्ट्रीकृत किया जायेगा।
(4) असंक्रमणीय अधिकार वाले किसी भूमिधर या असामी को किसी जोत में अपने हित को इǔछा पत्र द्वारा वसीयत करने का अधिकार न होगा।
(5) इस धारा के उपबन्धों के उल्लंघन में की गयी कोई वसीयत शून्य होगी।