स्त्री वारिस के नाते विरासत में हित प्राप्त करने वाली स्त्री का उत्तराधिकार-
जहाँ इस संहिता के प्रारम्भ होने के पूर्व या पश्चात् कोई स्त्री किसी जोत में पुरूष भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार का हित विरासत में प्राप्त करे और ऐसी स्त्री की ऐसे प्रारम्भ होने के पश्चात् मृत्यु हो जाय, वह विवाह कर ले या पुनर्विवाह कर ले वहाँ जोत में उसका हित धारा 107 और 112 के उपबंधों के अध्यधीन यथास्थिति अन्तिम पुरूष भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार के निकटतम जीवित वारिस को न्यागत होगा।
स्पष्टीकरण- इस धारा में पद ‘‘निकटतम जीवित वारिस’’ का तात्पर्य धारा 108 के अनुसार अभिनिश्चित वारिस से है।
परन्तु यह कि यदि पुत्री के रूप में विरासत प्राप्त करने वाली किसी स्त्री, जिसके पास इस संहिता की धारा 110 के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट वारिस जीवित हैं, की मृत्यु हो जाती है तो जोत में उसका हित
धारा 110 के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट वारिसों पर न्यागत होगा।