स्त्री  वारिस  से  भिन्न  स्त्री  भू-धारक  का  उत्तराधिकार-  

जहाँ इस संहिता के प्रारम्भ होने के पश्चात्
किसी  स्त्री  भूमिधर,  असामी  या  सरकारी  पट्टेदार  की  मृत्यु  हो  जाय,  वहाँ  किसी  जोत  या  उसके  भाग  में उसका हित धारा 107 से 109 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, नीचे दिए गए उत्तराधिकार क्रम के अनुसार न्यागत हो जायगा :-
(क) पुत्र,  अविवाहित  पुत्री,  पुत्र  का  पुत्र,  पुत्र के पुत्र का पुत्र, पूर्व मृत पुत्र की विधवा और पूर्व मृत पुत्र के पूर्व मृत पुत्र की विधवा, प्रति शाखा के अनुसार समान अंशों में ;
परन्तु प्रथमतः यह कि उसी शाखा का निकटतर दूरतर को अपवर्जित कर देगा ;
परन्तु द्वितीयतः यह कि कोई विधवा जिसने विवाह कर लिया हो, अपवर्जित हो जाएगी ;
(ख) पति;
(ग) ‘‘निरसित’’;
(घ) विवाहित पुत्री;
(ङ) पुत्री का पुत्र;
(च) पिता;
(छ) विधवा माता;
(ज) भाई जो उसी मृत पिता का पुत्र हो और भाई का पुत्र प्रति शाखा अनुसार;
(झ) अविवाहित बहिन;
(ञ) विवाहित बहिन;
(ट) बहिन का पुत्र।