उत्तरजीविता द्वारा सह-खातेदारों के हित का संक्रमण-
(1) जहाँ दो या उससे अधिक सह-विधवायें किसी पुरूष खातेदार का हित इस संहिता के प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात् उत्तराधिकार में प्राप्त करें और उनमें से कोई एक, ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् धारा 108 के अनुसार उत्तराधिकार के लिए हकदार कोई वारिस छोडे़ बिना मर जाए या पुनर्विवाह कर ले, वहां ऐसी सह-विधवा का हित उत्तरजीविता द्वारा उत्तरजीवी विधवा को और जहां दो या अधिक ऐसी उत्तरजीवी सह-विधवायें हों, वहां उत्तरजीवी सह-विधवाओं को समान अंश में, संक्रमित हो जायेगा।
(2) जहां कोई भूमि दो या अधिक सह-खातेदारों द्वारा धृत हो और इस संहिता के प्रारम्भ के पश्चात् उसमें से किसी एक की धारा 108 से 110 तक के अधीन उत्तराधिकार के लिए हकदार कोई वारिस छोडे़ बिना मृत्यु हो जाए, वहां ऐसे सह-खातेदार का हित, उत्तरजीवी सह-खोतेदारों को समान अंशों में संक्रमित हो
जायेगा।