न्यागमन  से  सम्बन्धित  सामान्य  शर्तें-  

इस  अध्याय  के  अधीन  किसी  जोत  में  हित  का  न्यागमन निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगा :-
(क)  यदि  किसी  भूमिधर,  असामी  या  सरकारी  पट्टेदार  कीवसीयत  के  बिना  मृत्यु  हो  जाती  है  और उसकी मृत्यु के समय कोई बǔचा गर्भ में था जो उसके बाद जीवित पैदा हुआ हो, तो ऐसे बǔचे को उत्तराधिकार का उसी प्रकार अधिकार होगा मानो यह ऐसे भूमिधर,  असामी  या  सरकारी  पट्टेदार  की मृत्यु के पहले पैदा हुआ या हुई हो और ऐसे मामले में उत्तराधिकार ऐसे भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार की मृत्यु के दिनांक से निहित समझा जायेगा;
(ख) जहां दो व्यक्तियों की मृत्यु ऐसी परिस्थिति में हुई हो जिससे यह निश्चित न हो पाये  कि उनमें से किस की मृत्यु हुई है और यदि मृत्यु हुई हो तो कौन दूसरे के बाद जीवित बचा है, तब किसी जोत में हित के न्यागमन के प्रयोजन के लिए यह उपधारणा की जाएगी कि, जब तक कि अन्यथा सिद्ध न हो जाए, छोटा बडे़ के बाद जीवित बचा है ;
(ग) कोई व्यक्ति जो किसी भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार की हत्या कर देता है या ऐसी हत्या किए जाने के लिए दुष्प्रेरित करता है वह किसी जोत में मृतक के हित को उत्तराधिकार में प्राप्त करने के लिए अयोग्य हो जाएगा ;
(घ) यदि कोई व्यक्ति खण्ड (ग) के अधीन किसी भूमिधर,  असामी  या  सरकारी  पट्टेदार  के जोत में हित को उत्तराधिकार में प्राप्त करने के लिए अयोग्य हो जाय, तो ऐसे हित का इस प्रकार न्यायगमन हो जायेगा मानों अयोग्य व्यक्ति की मृत्यु ऐसे भूमिधर,  असामी  या  सरकारी  पट्टेदार  की मृत्यु के पूर्व हुई हो।
स्पष्टीकरण-इस धारा में पद ‘‘हत्या’’ का तात्पर्य किसी ऐसे अपराध से है जो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302, धारा 304, धारा 304-ख, धारा 305 या धारा 306 के अधीन दण्डनीय है।