राजगामी  सम्पत्ति-  

(1)  जहाँ  किसी  भूमिधर  या  ग्राम  पंचायत  से  प्राप्त  भूमि  को  धृत  करने  वाले  किसी असामी  की  ज्ञात उत्तराधिकारी  के बिना मृत्यु हो जाए वहा उप ज़िलाधिकारी  ऐसे भूमिधर या असामी द्वारा धृत भूमि का कब्जा लेगा और उसे विहित रीति से किसी एक समय में एक कृषि वर्ष की अवधि के लिए
पट्टे पर दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक पट्टे की निबन्धन और शर्तें ऐसी होंगी जैसी विहित की जाय।
(3)  यदि  भूमि  पर  उप  ज़िलाधिकारी  द्वारा  कब्जा  लेने  के  तीन  वर्ष  के  भीतर,  कोई  दावेदार  भूमि  को  उसे
वापस  दिलाने  के  लिए  आवेदन  करे,  तो  उप  ज़िलाधिकारी  ऐसी  जांच  करने  के  पश्चात्  जिसे  वह  उचित समझे, ऐसे दावे को स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है।
(4)  उपधारा  (3)  के  अधीन  अपना  दावा  अस्वीकृत  होने  के  आदेश  से  क्षुब्ध  कोई  व्यक्ति  उसे  ऐसा  आदेश संसूचित  किये  जाने  के  दिनांक  के  एक  वर्ष  के  भीतर,  अपने  अधिकारों  की  घोषणा  के  लिए  धारा  144  के अधीन वाद प्रस्तुत कर सकता है।
(5) उप ज़िलाधिकारी  उपधारा (1) और (2) के अनुसार भूमि को पट्टे पर तब तक देता रहेगा जब तक कि उपधारा (4) में निर्दिष्ट वाद का अन्तिम रूप से विनिश्चय न हो जाय।
(6) यदि उप ज़िलाधिकारी द्वारा भूमि का कब्जा लेने के दिनांक से तीन वर्ष के भीतर कोई दावेदार उपस्थित न हो, या यदि ऐेसे दावेदार का जिसका दावा उपधारा (3) के अधीन अस्वीकार कर दिया गया हो, उपधारा
(4) के अनुसार वाद प्रस्तुत न करे या यदि ऐसा वाद प्रस्तुत करे और वह अन्तिम रूप से खारिज हो तो निम्नलिखित दिनांक से धारा 59 के अधीन किसी ग्राम  पंचायत  या स्थानीय प्राधिकरण में ऐसी भूमि निहित हुयी समझी जायेगी, अर्थात् :-
(क)  उपधारा  (3)  में  निर्दिष्ट  तीन  वर्ष  की  अवधि  के  समापन  के  दिनांक  से  जहां  कोई  दावेदार उपस्थित न हो; या
(ख) उपधारा (4) में निर्दिष्ट एक वर्ष की अवधि के समापन के दिनांक से जहां कोई दावेदार घोषणा का वाद दाखिल नहीं करता है; या
(ग) ऐसे अन्तिम  खारिजा  के दिनांक से जहां उपधारा  (4)  के अधीन  दावेदार द्वारा दाखिल किया गया वाद अन्ततः खारिज कर दिया गया है।
(7) जहां कोई दावेदार, उपधारा (3) के अधीन किसी दावे में या उपधारा (4) के अधीन किसी वाद में सफल होता है, वहां वह तत्समय प्रदत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी ऐसी भूमि पर अध्यासन और उसके सम्बन्ध में देय भू-राजस्व की समस्त बकाया उसके प्रबन्ध का व्यय काटने के पश्चात् पट्टेदार से वसूल किए गये लगान पाने का हकदार होगा।