समर्पण का प्रभाव-  

(1) किसी भूमिधर या असामी के सम्बन्ध में यह समझा जायेगा कि उसने अपने द्वारा धृत भूमि का समर्पण उस दिनांक से कर दिया है जब धारा 118 या धारा 119 के अनुसार ऐसी भूमि का कब्जा छोड़ दिया गया हो।
(2) जहाँ कोई भूमि-
(क) किसी असामी द्वारा समर्पित कर दी जाए, वहाँ ऐसी भूमि में उसका अधिकार, हक या हित ऐसे समर्पण के दिनांक से समाप्त समझा जाएगा;
(ख) किसी भूमिधर द्वारा समर्पित कर दी जाय, वहां ऐसे जोत में या उसके भाग में ऐसे भूमिधर का
और  उसके  माध्यम  से  दावा  करने  वाले  प्रत्येक  अन्य  व्यक्ति  का अधिकार,  हक  और  हित  उक्त दिनांक से समाप्त समझा जायेगा।