समर्पण की स्थिति में लगान या राजस्व का दायित्व-
धारा 118 से 120 के उपबन्धों के होते हुए भी, भूमिधर या असामी समर्पण के दिनांक के अनुगामी कृषि वर्ष के सम्बन्ध में जोत का, यथास्थिति, भू-राजस्व
या लगान का देनदार बना रहेगा, जब तक कि समर्पण का नोटिस अप्रैल की प्रथम दिनांक के पूर्व न दे
दिया गया हो।