असामी के विरूद्ध बेदखली आदि के लिए वाद-
(1) कोई असामी उसके द्वारा धारित भूमि से ग्राम पंचायत या भूमिधारक के वाद के सिवाय, जैसी भी स्थिति हो, जो कि निम्नलिखित में से एक या अधिक आधारों पर दाखिल किया जा सकता है, बेदखल नहीं किया जाएगा, अर्थात्ः-
(क) यह कि इस संहिता के उपबन्धों के अधीन असामी का हित उसके द्वारा धारित भूमि में समाप्त हो गया है;
(ख) यह कि असामी वर्षानुवर्ष या किसी एक अवधि के लिए भूमि धारण कर रहा था जो कि पहले ही समाप्त हो चुकी है या चालू कृषि वर्ष की समाप्ति के पूर्व समाप्त हो जाएगी;
(ग) यह कि असामी किसी ऐसे प्रयोजन हेतु भूमि का प्रयोग कर रहा है जो धारा 84 के द्वारा अनुज्ञेय नहीं है;
(घ) यह कि भूमि धारक धारा 95 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी निःशक्तता से ग्रस्त था और या तो उसकी निःशक्तता समाप्त हो गयी है या वह भूमि को अपने निजी कृषि उपयोग में लाना चाहता है;
(ङ) यह कि असामी एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए लगान का व्यतिक्रमी था और वह मांग की सूचना की तामील के बावजूद तीस दिनां की अवधि के भीतर भूमिधारक को उसका भुगतान करने में विफल रहा हो;
(च) यह कि असामी ने उसके द्वारा धारित सम्पूर्ण भूमि या उसके किसी भाग को इस संहिता के उपबन्धों के उल्लंघन में अंतरित कर दिया है।
(2) इस धारा के अधीन वाद दाखिल करने के पूर्व असामी को निकल जाने की कोई सूचना देना आवश्यक न होगी।
(3) भूमिधारक, बेदखली के किसी वाद में लगान के बकाये का भी दावा कर सकता है।
(4) भूमिधारक, असामी को बेदखली के लिऐ वाद दाखिल किये बिना भी लगान के बकाये का वाद दाखिल कर सकता है।