बकाया हेतु दावा की डिक्री देने वाले न्यायालय द्वारा आपदा के लिए छूट-
(1) जहाँ लगान की बकाया की वसूली के लिए वाद की सुनवाई करने वाले न्यायालय का यह समाधान हो जाए कि उस अवधि में जिसके लिए बकाया का दावा किया गया है, जोत का क्षेत्र जलप्लावन या अन्य प्रकार से सारवान रूप से
घट गया था या उसकी उपज सूखा, ओला, बालू जमा हो जाने या अन्य विपत्ति के कारण सारवान रूप से कम हो गयी थी, वहाँ वह लगान में ऐसी छूट दे सकता है जैसी उसे न्याय संगत प्रतीत हो;
परन्तु ऐसी किसी छूट से यह नहीं समझा जाएगा कि जिस अवधि के लिए वह दी गयी है उसके अतिरिक्त किसी और अवधि के लिए भी असामी द्वारा देय लगान में कोई परिवर्तन हो गया है।
(2) जहां न्यायालय उपधारा (1) के अधीन छूट दे, वहां राज्य सरकार या उसके द्वारा इस निमित्त अधिकृत कोई प्राधिकारी ऐसे सिद्धान्तों के अनुसार जो विहित किए जाय, भू-राजस्व में पारिणामिक छूट का आदेश
देगा।