गिरफ्तारी और निरोध-
(1) कोई भी व्यक्ति जिसने भू-राजस्व की बकाया का भुगतान करने में व्यतिक्रम किया हो, गिरफ्तार किया जा सकता है और उसे तहसील की हवालात में और यदि तहसील में कोई हवालात न हो तो ऐसे अन्य स्थान पर जिसे विहित किया जाय, पंद्रह दिन से अनधिक अवधि तक अभिरक्षा में निरुद्ध किया जा सकता है जब तक कि बकाया का उससे पहले ही भुगतान न कर दिया जायः
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, भू-राजस्व के बकाये के लिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या निरुद्ध नहीं किया जा सकेगा, जहां और जब तक के लिए कि ऐसा व्यक्तिः
(क) स्त्री या अवयस्क हो, या 65 वर्ष या उससे अधिक का वरिष्ठ नागरिक हो या धारा 95(1)(क) में
यथा निर्दिष्ट कोई व्यक्ति हो;
(ख) संघ के सशस्त्र बल का हो;
(ग) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 133, 135 या 135-क के अधीन छूट प्राप्त हो।
(3) इस धारा के अधीन कोई व्यक्ति अभिरक्षा में निरुद्ध नहीं किया जायेगा जब तक कि गिरफ्तारी वारण्ट जारीकर्ता अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण न हो कि निरूद्धि की प्रक्रिया बकाये की पूर्ण या सारभूत् अंश के भुगतान के लिए बाध्य करेगा।
(4) गिरफ्तारी वारण्ट जारी करने वाला अधिकारी ऐसे वारण्ट का समपहरण कर सकता है (वापस ले सकता है) यदि व्यतिक्रमी व्यक्ति सम्पूर्ण बकाये या उसके सारभूत अंश का भुगतान कर देता है या भुगतान करने का वचन देता है और उसके लिए पर्याप्त प्रतिभूति प्रस्तुत करता है।
(5) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुये भी, किसी व्यतिक्रमी को तभी गिरफ्तार किया जायेगा, जब वसूली के लिये ईप्सित धनराशि पचास हजार रुपये से अधिक हो।