जंगम सम्पत्ति की कुर्की और बिक्री-
(1) उप ज़िलाधिकारी व्यतिक्रमी की जंगम सम्पत्ति की जिसमें कृषि उपज भी सम्मिलित है, कुर्की और बिक्री कर सकता है।
(2) निम्नलिखित सम्पत्ति उपधारा (1) के अधीन कुर्की और उपधारा (5) के अधीन बिक्री से मुक्त होगीः-
(क) व्यतिक्रमी, उसकी पत्नी और उसके बǔचों के आवश्यक परिधान, रसोई के बर्तन, पलंग और बिस्तर और ऐसे व्यक्तिगत आभूषण जिनका धार्मिक प्रथा के अनुसार किसी महिला द्वारा त्याग नहीं किया जा सकता;
(ख) ग्रामीण शिल्पी के औजार और यदि व्यतिक्रमी कृषक हो, तो उसके खेती के उपकरण (यांत्रिक शक्ति द्वारा चालित उपकरण को छोड़कर) और ऐसे पशु और बीज, जो कुर्की अधिकारी की राय में उसी रूप में उसके जीविकोपार्जन कर सकने के लिए आवश्यक हों;
(ग) धार्मिक उपासना के उपयोग के लिए अनन्य रूप से अलग रखी गयी वस्तुएं।
स्पष्टीकरण 1- इस उपधारा के प्रयोजनार्थ, पद ‘‘कृषक’’ का तात्पर्य ऐसे उस व्यक्ति से है जो स्वयं भूमि पर खेती करता है और जो अपनी जीविका के लिए मुख्यतया कृषि भूमि से होने वाली आय पर निर्भर रहता है।
स्पष्टीकरण 2-स्पष्टीकरण 1 के प्रयोजनार्थ, किसी व्यक्ति के सम्बन्ध में यह समझा जाएगा कि वह स्वयं भूमि पर खेती करता है, यदि वह-
(क) स्वयं अपने श्रम से,
(ख) अपने कुटुम्ब के किसी सदस्य के श्रम से, या
(ग) नकद या वस्तुरूप में या दोनों प्रकार से देय मजदूरी पर सेवकों या श्रमिकों द्वारा, भूमि पर खेती करता है।
(3) जहां कोई जंगम सम्पत्ति वास्तविक अभिग्रहण द्वारा कुर्क की जाय और व्यतिक्रमी कुर्क अधिकारी को ऐसी प्रतिभूति दे जिससे उसका समाधान हो जाय, वहां इस प्रकार कुर्क की गयी सम्पत्ति व्यतिक्रमी की अभिरक्षा में छोड़ दी जायेगी। यदि कुर्की के समय व्यतिक्रमी उपलब्ध न हो या यदि उपलब्ध हो किन्तु कुर्क अधिकारी को ऐसी प्रतिभूति देने में विफल हो जिससे उसका समाधान हो जाय तो कुर्क की गयी सम्पत्ति किसी ऐसे उत्तरदायी व्यक्ति की अभिरक्षा में छोड़ी जा सकती है जो उसकी अभिरक्षा का भार लेने को इǔछुक हो : परन्तु पशुधन की स्थिति में, उसे निकटतम कांजी हाउस में ले जाया जा सकता है यदि न तो व्यतिक्रमी ऐसी प्रतिभूति देता है और न कोई उत्तरदायी व्यक्ति उसकी अभिरक्षा का भार लेने का इǔछुक हो।
(4) ऐसा व्यक्ति जो उपधारा (3) के अधीन किसी जंगम सम्पत्ति की अभिरक्षा का भार लेता है, विहित प्रपत्र में एक बन्ध-पत्र (सुपुर्दनामा) (जो स्टाम्प शुल्क से मुक्त होगा) निष्पादित करेगा और ऐसी सम्पत्ति का परिरक्षण और अनुरक्षण करेगा और जहां कहीं अपेक्षित हो उसे प्रस्तुत करेगा। सुपुर्ददार उसकी अभिरक्षा में
दी गयी सम्पत्ति की समस्त क्षति या हानि या आवश्यकता पड़ने पर उसे प्रस्तुत करने में विफलता के लिए दायी होगा। ऐसी क्षतियों या हानि का अवधारण उप ज़िलाधिकारी द्वारा किया जायेगा और वे सुपुर्ददार से भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूल किए जा सकेंगे।
(5) यदि इस धारा के अधीन स्थावर सम्पत्ति की कुर्की के दिनांक से तीस दिनां की अवधि के भीतर बकाये
की धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो उप ज़िलाधिकारी विहित रीति से उसका विक्रय कर सकता है।