जोत का पट्टा-
(1) जहां कोई भूमि धारा 174 के अधीन कुर्क की जाय, वहां कलेक्टर संहिता में किसी बात के होते हुए भी किन्तु ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जिन्हें विहित किया जाय, ठीक आगामी जुलाई के प्रथम दिनांक से दस वर्ष से अनधिक की ऐसी अवधि के लिए जिसे वह उचित समझे, व्यतिक्रमी से भिन्न किसी व्यक्ति को पट्टे पर दे सकता है।
(2) ऐसा व्यक्ति जिसे उपधारा (1) के अधीन कोई भूमि पट्टे पर दी जाय, ऐसी भूमि पर देय सम्पूर्ण बकाया का भुगतान करने और पट्टे की अवधि के दौरान भू-राजस्व उस दर से, जो ऐसी भ्ूमि के सम्बन्ध में उसकी कुर्की किए जाने के ठीक पूर्व व्यतिक्रमी द्वारा देय रही हो, भुगतान करने के लिए आबद्ध होगा।
(3) यदि पट्टे की अवधि में, पट्टेदार पट्टे के अधीन देय किसी धनराशि का भुगतान करने में व्यतिक्रम करें
और उसके बाकी अवधि तक पट्टे पर भूमि किसी अन्य व्यक्ति को न लेना हो तो उससे ऐसी धनराशि धारा 170 में उल्लिखित किसी एक या अधिक प्रक्रियाओं से वसूल की जा सकती है और पट्टा भी समाप्त किया जा सकेगा।
(4) पट्टे की अवधि समाप्त होने पर, भूमि सम्बद्ध खातेदार को ऐसी भूमि के सम्बन्ध में राजस्व की किसी बकाया के लिए राज्य सरकार की ओर से किसी भी दावे से मुक्त, वापस कर दी जाएगी।