रिसीवर की नियुक्ति-
(1) जहां किसी व्यतिक्रमी से भू-राजस्व की कोई बकाया देय हो, वहां कलेक्टर आदेश द्वारा-
(क) व्यतिक्रमी की किसी जंगम या स्थावर सम्पत्ति का ऐसी अवधि के लिए जिसे वह उचित समझे, रिसीवर नियुक्ति कर सकता है;
(ख) किसी व्यक्ति को सम्पत्ति के कब्जे या उसकी अभिरक्षा से हटा सकता है और उस भूमि को रिसीवर के कब्जे, अभिरक्षा या प्रबन्ध में दे सकता है;
(ग) रिसीवर को वाद प्रस्तुत करने और उनका प्रतिवाद करने, सम्पत्ति की वसूली, प्रबन्ध, संरक्षण, परिरक्षण और सुधार करने, उसका लगान और लाभ का संग्रह करने, ऐसे लगान और लाभ का उपयोग और निस्तारण करने और दस्तावेजों का निष्पादन करने की ऐसी सभी शक्तियां प्रदान कर सकता है जो ऐसे व्यतिक्रमी के पास हों, या उनमें से ऐसी किन्हीं शक्तियों को प्रदान कर सकता है जिसे कलेक्टर उचित समझें।
(2) इस धारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे हटाने का वर्तमान अधिकार व्यतिक्रमी को न हो, सम्पत्ति के कब्जे या अभिरक्षा से हटाने के लिए कलेक्टर को प्राधिकृत नहीं करेगी।
(3) कलेक्टर समय-समय पर रिसीवर की नियुक्ति की कालावधि बढ़ा सकता है।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन कोई आदेश तब तक नहीं दिया जायेगा जब तक कि व्यतिक्रमी को कारण बताने का नोटिस न दे दिया जाय और ऐसे अभ्यावेदन पर जो ऐसे नोटिस के प्रत्युत्तर में कलेक्टर द्वारा प्राप्त हो, विचार न कर लिया जाय। परन्तु उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन कोई अंतरिम आदेश, ऐसी सूचना के जारी किए जाने के पहले या बाद में किसी भी समय किया जा सकता है।
परन्तु अग्रेतर यह कि जहां ऐसी सूचना जारी किए जाने के पूर्व कोई अंतरिम आदेश किया जाता है तो अंतरिम आदेश के दिनांक से दो सप्ताह के भीतर कोई सूचना जारी न किए जाने पर ऐसा आदेश निरस्त हो जायेगा।
(5) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की प्रथम अनुसूची मे दिए गए आदेश 40 के नियम 2 से 4 के उपबन्ध
यथा आवश्यक परिवर्तनों सहित इस धारा के अधीन नियुक्त रिसीवर के सम्बन्ध में लागू होंगें।
(6) रिसीवर, कलेक्टर के नियंत्रण के अधीन रहते हुए कार्य करेगा और ऐसी सूचना, विवरणी या विवरण-पत्र प्रस्तुत करेगा, जिसे कलेक्टर उचित समझे।
(7) कलेक्टर लिखित आदेश से और कोई कारण बताये बिना किसी रिसीवर को ऐसे रिसीवर का कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व हटा सकता है और उसके स्थान पर कोई अन्य रिसीवर नियुक्त कर सकता है, यदि उसका यह समाधान हो जाय कि अदक्षता, घोर उपेक्षा, जान बूझकर व्यतिक्रम, अवज्ञा, अवचार, गम्भीर लोप
या किसी सम्पत्ति के दुर्विनियोग के आधार पर किसी रिसीवर का बना रहना वांछनीय या समीचीन न होगा। इस धारा के अधीन रिसीवर के पद से हटाया गया व्यक्ति, हटायेजाने के कारण किसी क्षतिपूर्ति या प्रतिकर का दावा करने का हकदार नहीं होगा।
(8) कलेक्टर को रिसीवर को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् यह अवधारण करने कि रिसीवर के जान-बूझकर व्यतिक्रम करने, अवचार या उसकी घोर उपेक्षा से या किसी दुर्विनियोग के कारण क्या और कितनी हानि, यदि कोई हो, हुई है और रिसीवर से हानि की धनराशि भू-राजस्व की बकाया की तरह वसूल करने की शक्ति होगी।
(9) सम्पत्ति का लगान लाभ या उससे प्राप्त कोई अन्य आय, प्रबन्ध व्यय को जिसमें रिसीवर का पारिश्रमिक भी सम्मिलित है, चुकता करने के पश्चात बकाया को चुकता करने में समायोजित किया जायेगा और शेष
धन, यदि कोई हो, व्यतिक्रमी को दे दिया जायेगा।
(10) जैसे ही उपधारा (9) के अधीन या अन्य प्रकार से बकाया चुकता हो जाय, कलेक्टर व्यतिक्रमी को सम्पत्ति वापस कर देगा।