विधिक प्रतिनिधियों इत्यादि के विरूद्व वसूली की कार्यवाही-
(1) यदि इस अध्याय के अधीन बकाया की वसूली के लिए कोई कार्यवाही प्रारम्भ होने के पूर्व या पश्चात् किसी समय व्यतिक्रमी की मृत्यु हो जाय तो व्यतिक्रमी के विधिक प्रतिनिधियों के विरूद्व कार्यवाहियां (गिरफ्तारी और निरोध के सिवाय) प्रारम्भ की जा सकेंगी या चालू रखी जा सकेंगी मानों विधिक प्रतिनिधि स्वयं व्यतिक्रमी रहे हों :
परन्तु ऐसे विधिक प्रतिनिधि का दायित्व मृतक की सम्पत्ति की केवल उस सीमा तक होगा जो उसके हाथ लगी है।
(2) जहां इस अध्याय के अधीन कोई व्यक्ति व्यतिक्रमी द्वारा देय धनराशि के लिए प्रतिभू हुआ हो, वहां इस अध्याय के अधीन उसके विरूद्व कार्यवाही की जा सकती है मानों वह स्वयं व्यतिक्रमी हो।