अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति द्वारा धृत भूमि का नीलामी विक्रय-
जहां किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का किसी भूमि में अधिकार, हक या हित इस संहिता के उपबन्धों के अधीन या के अनुसार सार्वजनिक नीलामी द्वारा विक्रय किया जाता है और ऐसी जाति या जनजाति का कोई अन्य व्यक्ति ऐसी नीलामी के तीस दिन के भीतर अधिकतम बोली की धनराशि के बराबर धनराशि और क्रेता को भुगतान करने के लिये क्रय धन के एक प्रतिशत के बराबर की धनराशि का भुगतान करता है तो इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी अन्य उपबन्ध के होते हुए भी, ऐसी धनराशि देने वाला व्यक्ति विक्रय के मामले में ऐसे व्यक्ति से, जो ऐसी जाति या जनजाति का न हो, अधिक वरीयता पाने का हकदार होगाः
परन्तु यह कि यदि ऐसा जमा करने के लिए एक से अधिक व्यक्ति है तो मौके पर ही उनमें से बोली लगवायी जायेगी और अधिकतम बोली लगाने वाला ऐसी वरीयता का हकदार होगा।
परन्तु यह और कि जहाँ पर अधिकतम बोली वाले व्यक्ति के पक्ष में, इस धारा के अन्तर्गत अधिमानता के कारण, पुष्टि नहीं हो पाती है, वह अपने द्वारा जमा की हुई धनराशि एवं उस प्रयोजन के लिए जमा की हुई ऐसी धनराशि के एक प्रतिशत की धनराशि को वापस प्राप्त करने का हकदार होगा।