वाद का वर्जन-
धारा 203 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, भू-राजस्व के किसी निर्धारण या संग्रहण या भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूली योग्य किसी धनराशि की वसूली के सम्बन्ध में किसी सिविल न्यायालय में कोई वाद या कार्यवाही नहीं होगी।