कतिपय अपीलों के विरूद्व वर्जन-
धारा 207 और 208 में किसी बात के होते हुए भी निम्नलिखित किसीआदेश या डिक्री के विरूद्व अपील नहीं होगी जोः-
(क) इस संहिता के अध्याय ग्यारह के अधीन किया गयाः
(ख) परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के अधीन विलम्ब की माफी के लिए किसी प्रार्थना-पत्र को स्वीकार करना या अस्वीकार करनाः
(ग) पुनरीक्षण के लिए किसी प्रार्थना पत्र को अस्वीकार करनाः
घ) रोक के लिए किसी प्रार्थना पत्र को स्वीकार करना या अस्वीकार करनाः
(ड.) किसी अधीनस्थ न्यायालय को मामले को प्रतिप्रेषित करनाः
(च) जहां ऐसा आदेश या डिक्री अंतरिम प्रकृति का हैः
(छ) पक्षकारों की सहमति से न्यायालय या अधिकारी द्वारा पारितः या
(ज) जहां ऐसा आदेश एकपक्षीय या व्यतिक्रम में पारित किया गया हैः
परन्तु यह कि एकपक्षीय या व्यतिक्रम में पारित आदेश से क्षुब्ध पक्षकार ऐसे आदेश के दिनांक से तीस दिन की अवधि के अन्दर उस आदेश को अपास्त कराने के लिये प्रार्थना-पत्र दे सकता हैः
परन्तु यह और कि ऐसा कोई आदेश उस पक्षकार को जिसके पक्ष में आदेश किया गया है,
उपस्थित होने एवं इसके समर्थन में सुने जाने के लिए, पहले समन किये बिना उलटा या परिवर्तित नहीं किया जायेगा।