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UP REVENUE CODE
English
Hindi
CHAPTER 1 : PRELIMINARY
CHAPTER 2 : REVENUE DIVISIONS
CHAPTER 3 : BOARD AND THE REVENUE OFFICERS
CHAPTER 4 : BOUNDARIES AND BOUNDARY MARKS
CHAPTER 5 : MAINTENANCE OF VILLAGE RECORDS
CHAPTER 6 : REVISION OF VILLAGE RECORDS
CHAPTER 7 : OWNERSHIP OF LAND OTHER PROPERTIES
CHAPTER 8 : MANAGEMENT OF LAND AND OTHER PROPERTIES BY GRAM PANCHAYAT OR OTHER LOCAL AUTHORITY
CHAPTER 9 : TENURES
CHAPTER 10 : GOVERNMENT LESSEES
CHAPTER 11 : ASSESSMENT OF LAND REVENUE
CHAPTER 12 : COLLECTION OF LAND REVENUE
CHAPTER 13 : JURISDICTION AND PROCEDURE OF REVENUE COURTS
CHAPTER 14 : MISCELLANEOUS
CHAPTER 15 : PENALTIES
CHAPTER 16 : REPEAL AND SAVINGS
FIRST SCHEDULE (See Sections 2 and 230 ) LIST-A Enactments of general applications
LIST-B Enactments having special reference to territories now comprised in the State of Uttarakhand
SECOND SCHEDULE (See Sections 206 (2)(a)) Matters excluded from the jurisdiction of the Civil Court
THIRD SCHEDULE (See Sections 206, 207 and 208)
FOURTH SCHEDULE (See Section 222 )
74. खाता खातेदारी का वर्ग.
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75. संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर.
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76. असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर.
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77. कतिपय भूमि पर भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं होंगे.
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78. असामी.
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79. अनन्य कब्जा के लिए भूमिधरों को अधिकार.
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80. औद्योगिक, वाणिज्यिक या आवासीय प्रयोजनां के लिए जोत का उपयोग.
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81. घोषणा का परिणाम.
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82. घोषणा का रद्द किया जाना.
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83. घोषणा या रद्दकरण को अभिलिखित किया जाना.
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84. असामी का अपनी जोत पर अनन्य कब्जा का अधिकार.
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85. इस संहिता के उपबन्धों के उल्लंघन में भूमि का उपयोग करने के परिणाम.
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86. असंक्रमणीय अधिकारों वाले भूमिधर का या असामी के हित का समाप्त हो जाना.
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87. सुधार जिसे न हटाया जाय.
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88. भूमिधरों के हितों की संक्रमणीयता.
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89. भूमिधर द्वारा अन्तरण पर प्रतिबन्ध.
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90. भारतीय नागरिकों से भिन्न व्यक्तियों द्वारा भूमि का अर्जन न किया जाना.
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91. बन्धक द्वारा अन्तरण पर प्रतिबन्ध.
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92. असंक्रमणीय अधिकारों वाले भूमिधर द्वारा भूमि को बंधक रखना.
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93. धनराशि प्राप्त करने के लिए कब्जा का अन्तरण विक्रय माना जायेगा.
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94. पट्टे पर प्रतिबन्ध.
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95. किसी निःशक्त व्यक्ति द्वारा पट्टा करना.
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96. निःशक्त सह-अंशधारकों द्वारा पट्टा करना.
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97. पट्टा कैसे किया जायेगा.
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98. अनुसूचित जाति के भूमिधरों द्वारा अन्तरण पर प्रतिबन्ध.
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99. अनुसूचित जनजाति के भूमिधरों द्वारा अन्तरण पर प्रतिबन्ध.
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100. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों द्वारा बंधक रखना.
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101. विनिमय.
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102. विनिमय के परिणाम.
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103. इस संहिता के उल्लंघन में पट्टे का प्रभाव.
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104. इस संहिता के उल्लंघन में अंतरण शून्य होगा.
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105. संहिता के उल्लंघन में भूमिधर द्वारा अंतरण का परिणाम.
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106. इस संहिता के उल्लंघन में असामी द्वारा किए गए अन्तरण का परिणाम.
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107. भूमिधर या असामी द्वारा वसीयत-
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108. पुरूष भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार के उत्तराधिकार का सामान्य क्रम.
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109. स्त्री वारिस के नाते विरासत में हित प्राप्त करने वाली स्त्री का उत्तराधिकार-
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110. स्त्री वारिस से भिन्न स्त्री भू-धारक का उत्तराधिकार.
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111. धार्मिक विन्यासों आदि के प्रति व्यावृत्तियां.
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112. उत्तरजीविता द्वारा सह-खातेदारों के हित का संक्रमण.
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113. भारतीय नागरिक तथा भारतीय मूल से भिन्न व्यक्ति विरासत प्राप्त नहीं करेंगे.
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114. न्यागमन से सम्बन्धित सामान्य शर्तें.
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115. राजगामी सम्पत्ति.
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116. जोत के विभाजन के लिये वाद.
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117. जोत के विभाजन के लिये न्यायालय का कर्तव्य.
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118. भूमिधर द्वारा समर्पण-
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119. असामी द्वारा समर्पण.
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120. समर्पण का प्रभाव.
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121. समर्पण की स्थिति में लगान या राजस्व का दायित्व.
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122. भूमिधर द्वारा परित्याग.
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123. परित्याग का परिणाम.
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124. ग्राम पंचायत को कब्जा देना.
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125. ग्राम पंचायत को सौंपी गई भूमि में भूमि प्रबन्धक समिति द्वारा प्रवेश.
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126. भूमि प्रबन्धक समिति द्वारा भूमि उठाने में वरीयता क्रम.
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127. आवंटन का परिणाम.
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128. आवंटन और पट्टा रद्द किया जाना.
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129. आवंटिती या सरकारी पट्टेदार को कब्जा देने की बहाली.
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130. भूमिधरों को बेदखल न किया जाना.
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131. असामी के विरूद्ध बेदखली आदि के लिए वाद.
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132. फसलों और पेड़़ों पर अधिकार.
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133. व्यादेश, क्षतिपूर्ति आदि के लिए वाद.
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134. बिना हक के भूमि के अध्यासी व्यक्तियों की बेदखली.
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135 ‘‘निरसित’’
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136, ग्राम पंचायत की भूमि से अतिचारी की बेदखली.
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137. गलत बेदखली के लिए उपचार.
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138. सामी द्वारा देय लगान-
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139. लगान निर्धारण के लिए वाद.
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140. बकाया हेतु दावा की डिक्री देने वाले न्यायालय द्वारा आपदा के लिए छूट.
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141. लगान की गणना.
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142. ग्राम पंचायत आदि के असामी से बकाया लगान की वसूली.
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143. बकाया लगान को बट्टे खाते डालने की शक्ति.
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144. खातेदार द्वारा घोषणात्मक वाद.
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145. ग्राम पंचायत द्वारा घोषणात्मक वाद.
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146. व्यादेश का उपबंध.
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